Authentic Tenali Rama Moral Stories In Hindi

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Tenali Rama Stories In Hindi:

गुलाबचंदजी की कढ़ाई:

एक दिन तेनाली रामा मंदिर में ब्राम्हण भोज देने के लिए, उनके पड़ोसी शास्त्रीजी के यहाँ बड़ी कढ़ाई लाने गए। तब शास्त्रीजी के पुत्र घर पे अकेला था, जिसका नाम था गुलाबचंद । गुलाबचंद को दुसरो को मुर्ख बनाने में बड़ा मजा आता था। तेनाली रामा ने उनसे बड़ी कढ़ाई माँगने पर गुलाबचंद ने रामा को दे दी। गुलाबचंद ने रामा से कहा की कढ़ाई संभालके ले जाना, क्योंकि कढ़ाई पेट से है।

दूसरे दिन तेनाली रामा ने मंदिर में भोज देने के बाद, अन्य बर्तनों के साथ कढ़ाई भी घर ले आया। कुछ देर पश्चात गुलाबचंद खुद चलकर रामा के घर आया और उनसे बर्तन माँगने लगा। रामा ने भी उनकी बड़ी कढ़ाई गुलाबचंद को दे दी।

कढ़ाई देने पर गुलाबचंद बोला कढ़ाई तो ठीक है लेकिन इसके बच्चे कहा है? तेनाली रामा ने कहाँ कैसे बच्चे मैंने तो कल बस कढ़ाई ली थी, और कढ़ाई के भी कभी बच्चे होते है क्या?

गुलाबचंद बोला, “हाँ, होते है कल कढ़ाई पेट से थी इसिलए, कल मैंने आपको कढ़ाई संभलकर ले जाने को कहा था।” कुछ समय बहस चलती रही लेकिन, कुछ भी करके गुलाबचंद मानने को ही तैयार नहीं था। तब रामा ने चार छोटी कटोरिया भी बड़ी कढ़ाई के साथ दे दी।

अब गुलाबचंद बहुत खुश हुआ, उसे लगा लोगों ने व्यर्थ में ही तेनाली रामा को सर पे चढ़ा रखा है। उसके जैसा बेवकूफ तो पुरे विजयनगर में नहीं है।

तेनाली रामा दूसरे दिन फिर उसी शास्त्रीजी के यहाँ बर्तन माँगने चले गए। उस दिन फिर से गुलाबचंद घर पे मौजूद था। गुलाबचंद को लगा चलो फिर से बकरा खुद आया है कसाई के यहाँ। उसने खुश होकर फिर से बर्तन तेनाली रामा को दे दिए। आज भी गुलाबचंद ने जाते समय संभलकर ले जाने को कहाँ। तेनाली रामा ने हँसते हुए कहाँ, “गुलाबचंदजी आप चिंता ना करे में आपके कढ़ाई को एकदम आराम से ले जाऊँगा।”

दूसरे दिन गुलाबचंद फिर से तेनाली रामा के घर अपने बर्तन माँगने चला गया। तब तेनाली रामा दुखी चेहरा करके बोला, “आपको, कैसे बताये कल रातको आपकी कढ़ाई प्रसवपीड़ा से मर गयी।”

अब गुलाबचंद बोला परेशान होकर बोला, “लेकिन, ये कैसे संभव है, कढ़ाई कभी मरती है क्या?”

तब तेनाली रामा बोला, “हाँ, क्या करे अब सच तो यही है।”
गुलाबचंद फिर से बोला, “आप क्या पागल हो गए है? कढ़ाई की भी कभी मृत्यू होती है भला? लाइए मेरी कढ़ाई मुझे वापस करिये।”

तब तेनाली रामा बोला, “अगर कढ़ाई पेट से हो सकती है, और कढ़ाई के बच्चे हो सकते है, तो कढ़ाई मर क्यों नहीं सकती?”

अब गुलाबचंद को सब कुछ समझ में आ गया। गुलाबचंद ने तेनाली रामा से माफ़ी मांगी और उनकी कटोरिया वापस कर अपनी कढ़ाई लेकर वापस चला गया।

सिख: कभी भी दुसरो को मुर्ख समझने या बनाने की भूल ना करें। ऐसा करने पर एक दिन दूसरों के लिए बनाये जाल में स्वयं ही फस जाओगे।

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